mere mehboob qayamat Chords by kishor kumar
By kishor kumar
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मेरे महबूब क़यामत होगी
आज रुसवा तेरी गलियों में मोहब्बत होगी
नाम निकलेगा तेरा ही लब से
जान जब इस दिल-ए-नाकाम से रुखसत होगी
मेरे महबूब
मेरे सनम के दर से अगर
बाद-ए-सबा हो तेरा गुज़र
कहना सितमगर कुछ है खबर
तेरा नाम लिया जब तक भी जिया
ऐ शमा तेरा परवाना
जिससे अब तक तुझे नफरत होगी
आज रुसवा तेरी गलियों में मोहब्बत होगी
मेरे महबूब क़यामत होगी
आज रुसवा तेरी गलियों में मोहब्बत होगी
मेरे महबूब
मेरी तरह तू आहें भरे तू भी किसी से प्यार करे
और रहे वो तुझसे परे तूने ओ सनम ढायें हैं सितम
तो ये तू भूल न जाना के ना तुझपे भी इनायत होगी
आज रुसवा तेरी गलियों में मोहब्बत होगी
मेरे महबूब